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मछलियों को मारने के लिए नदी में डाला जहर

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मयनागुड़ी : नदी में जहर डालकर मछली मारने का मामला फिर एक बार गोरुमारा जंगल संलग्न मयनागुड़ी ब्लॉक के पानबाड़ी इलाके में देखा गया. जंगल के समीप जलढाका, डायना व मूर्ति नदी के संगम स्थल पानबाड़ी नौका विहार इलाके में गुरुवार तड़के मरी हुई मछलियां निकलने लगी. जानकारी मिली है कि मछली पकड़ने गये कुछ मछुआरों ने किनारे पर मछलियों को छटपटाते देखा. देखते ही देखते आसपास के लोग वहां इकट्ठा हो गये. उल्लेखनीय है कि कूछदिनों पहले पानबाड़ी इलाके के इछिलामारी मदि में जहरीली तेल डालकर मछली पकड़ने की शिकायत मिली थी. गुरुवार सुबह  नदी तट पर जलढाका नदी की नामचीन मछली बोरोली, पोठिया, झिंगा व केंकड़ा सहित विभिन्न लोकल मछलियां मरी हुई नजर आयी. स्थानीय मछुआरों ने बताया तड़के जब वे नदी में मछली पकड़ने गये थे उस समय दो व्यक्तियों को इलाके में देखा.

दोनों ही मछुआरों को देखकर गदेयारकुठी जंगल की ओर भाग निकले. इलाके से मछली पकड़ने का एक जाल, जहर की शीशी व मरी हुई मछलियां बरामद हुई है. पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यह इलाका जंगली पशुओं का विचरण भूमी है. यहां हाथी, गैंडा, बाइसन, हीरण, तेंदुआ आदि पशु नदी में पानी पीने आते हैं. इससे वन्य जीवों की सुरक्षा पर भी खतरा मंडराने लगा है. सर्दी बढ़ने के साथ ही इलाके में विदेशी पक्षियों का आनाजाना शुरू हो गया है. जहर से मरी हुई मछलियां खाकर पक्षियों की भी मौत होने की आशंका की जा रही है. 

 मयनागुड़ी कॉलेज के भूगोल के प्रोफेसर डॉ. मधुसूदन कर्मकार ने बताया कि यह गंभीर चिंता का विषय है. नदी के पानी को जहरीला बनाने से असके भयानक परिणाम हो सकते हैं. ये मछलियां बाजारों में आये तो उससे इंसानो के बीमार पड़ने की संभावना है.

रामशाई ग्राम पंचायत की ओर से इलाके में जागरुकता अभियान चलाने की बात बतायी गयी है. गोरुमारा वन्यप्रणी विभाग के बुधुराम बीट के बीट ऑफिसर स्मृति राई ने बताया कि जंगल संलग्न इलाके में इस तरह के अपराधिक कार्य की छानबीन की जायेगी. मयनागुड़ी थाना आईसी तमाल दास ने कहा कि अपराध को रोकने के लिए इलाके में निगरानी की जा रही है. 

 



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