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सड़क हादसों में तीन से अधिक मौत होने पर जांच की जायेगी

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रांची : राज्य भर में कहीं भी होनेवाली सड़क दुर्घटना में यदि तीन से अधिक लोगों की मौत होती है, तो उस दुर्घटना की जांच कराना जरूरी होगा. सड़क दुर्घटना से होनेवाली मौत रोकने, ब्लैक स्पॉट चिह्नित करने तथा जरूरत हो, तो संबंधित स्थल की सड़क संरचना में सुधार के लिए यह जांच की जायेगी. परिवहन विभाग ने सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी के निर्देश के अालोक में झारखंड सड़क दुर्घटना जांच योजना (झारखंड रोड एक्सिडेंट इंवेस्टिंग स्कीम)-2019 की अधिसूचना जारी कर दी है. 
 
इसके तहत हर जिले में जिला सड़क दुर्घटना जांच टीम होगी. इसमें एक पुलिस अधिकारी (इंस्पेक्टर या ऊपर रैंक के), पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता तथा जिला मोटर वाहन निरीक्षक (एमवीआइ) होंगे. 
 
सड़क दुर्घटना की प्राथमिक जिम्मेवारी पुलिस अधिकारी की होगी. जांच के दौरान कार्यपालक अभियंता तथा एमवीआइ को दुर्घटना के बारे में सूचित करने का काम संबंधित पुलिस अधिकारी का होगा. सूचना मिलने पर भी असहयोग की स्थिति होने पर पुलिस अधिकारी दोनों अधिकारियों के साथ लिखित पत्राचार करेगा तथा इसकी रिसिविंग रखेगा. 
असहयोग करने पर कार्रवाई के लिए यह प्रावधान किया गया है. पुलिस अधिकारी अपनी जांच रिपोर्ट दुर्घटना के दो दिनों के अंदर टीम के दूसरे अधिकारियों को उनके इनपुट के लिए उपलब्ध करायेंगे. इनपुट मिल जाने पर सबके संयुक्त हस्ताक्षर वाली फाइनल रिपोर्ट तय फॉरमैट में राज्य के सड़क सुरक्षा विंग (रोड सेफ्टी सेल) को भेजी जायेगी. 
 
रिपोर्ट एडीजीपी (अॉपरेशन) को भी दी जायेगी. यह काम अधिकतम 10 दिनों में कर लेना होगा. सड़क जांच योजना की अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि जिला सड़क सुरक्षा टीम के तीनों सदस्यों को जरूरत के अनुसार फोटोग्राफी भी करनी है. कार्यपालक अभियंता रोड इंजीनियरिंग के व्यू से फोटोग्राफी करेंगे. वहीं एमवीआइ वाहन की तस्वीर लेंगे.
 
टीम के समन्वय व विवाद के लिए स्टेट कमेटी : जांच टीम के समन्वय तथा आपसी विवाद सुलझाने के लिए परिवहन सचिव की अध्यक्षता में एक स्टेट कमेटी होगी. संयुक्त परिवहन आयुक्त (सड़क सुरक्षा) इसके सदस्य सचिव तथा एडीजीपी (अॉपरेशन), पथ निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता तथा संयुक्त परिवहन आयुक्त कमेटी के सदस्य होंगे.



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