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विश्वभारती विश्वविद्यालय की राष्ट्र निर्माण में शानदार भूमिका रही है

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शांति निकेतन : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को विश्वभारती विश्वविद्यालय की जमकर सराहना की. उन्होंने संस्थान को देश की संस्कृति और चरित्र को बरकरार रखने वाला करार देते हुए कहा कि उनका यह दौरा किसी तीर्थयात्रा से कम नहीं है. विश्वविद्यालय के वार्षिक दीक्षांत समारोह को परिदर्शक (विजिटर) के तौर पर संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा के इस केंद्र ने राष्ट्र निर्माण में शानदार भूमिका निभायी है. 

 
उन्होंने कहा : मैं इसे (विश्वविद्यालय के दौरे को) एक तीर्थयात्रा कहूंगा, क्योंकि आधुनिक भारत की दो महान विभूतियां रवींद्रनाथ टैगोर (विश्वविद्यालय के संस्थापक) और महात्मा गांधी अक्सर यहां मिलते थे. 
 
यहीं से हम इन महान संतों के जीवन के सूत्रों और सबक को समझकर उनसे शिक्षा ले सकते हैं. कोविंद ने कहा कि 1935 में जब विश्वविद्यालय को कोष की नितांत आवश्यकता थी तब टैगोर ने गांधी से इस बारे में जिक्र किया और उन्हें 60 हजार रुपये का ड्राफ्ट प्राप्त हुआ.
 
गुरुदेव ने (शिक्षा के) एक वैकल्पिक मॉडल का विचार किया जो प्रकृति के साथ करीबी संबंध की वकालत करती थी और विश्वभारती विश्वविद्यालय आज तक इस परंपरा का पालन कर रहा है. 



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