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विज्ञान के बदलते सिद्धांतों में वशिष्ठ बाबू का गणितीय सोच

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पटना : वंगत डा वशिष्ठ नारायण सिंह ने भौतिक विज्ञान की सबसे दुरूह शाखा क्वांटम मेकेनिक्स में योगदान देने के लिए हिल्बर्ट स्पेस नाम के गणितीय आधार  का इस्तेमाल किया था. हिल्बर्ट स्पेस गणित में फंक्सनल मैथ की शाखा है. यह सबसे कठिन संकल्पना है. गणित में उनकी पीएचडी रिसर्च पेपर ''रिप्रोड्यूजिंग कर्नल्स एंड ऑपरेटर्स विद साइक्लिक वेक्टर '' नाम से 1974 में पैसिफिक जर्नल ऑफ मैथमैटिक्स में 18  पेजों में  प्रकाशित हुआ. इसमें उन्होंने गणितीय आधार पर विज्ञान के कुछ रहस्यों  पर अपने मत दिये.  

 

उन्होंने अपने रिसर्च  पेपर में संकेत दिये  थे कि दुनिया में कुछ भी अनंत नहीं है. उसे गणितीय संकल्पना के आधार पर समझा जा सकता है. उस समय उनकी ये मौलिक सोच थी.  वर्तमान दुनिया के तमाम भौतिकी विज्ञानी उन्हीं की इस अवधारणा को आगे बढ़ाने में लगे हैं. 

 

जानकारों का कहना है कि  आगामी दस सालों में विज्ञान की कुछ खास अवधारणाओं में बदलाव होने जा रहे हैं, इनमें वे अवधारणाएं भी शामिल हैं, जिन पर उन्होंने अपने रिसर्च  पेपर में  अभिमत दिया था. जाहिर है कि विज्ञान की  अवधारणाओं में होने वाले   बदलाव की नींव में  दुनिया के चुनिंदा गणितज्ञों में भारत के 'लाल' दिवंगत डॉ वशिष्ठ नारायण सिंह भी शामिल हैं. उन्होंने अपने रिसर्च पेपर में थ्री डायमेंशन (लंबाई,चौड़ाई और ऊंचाई ) से परे कुछ और आयामों की संभावना जतायी  थी. उन्होंने अपने रिसर्च में क्वांटम मैकेनिक्स पर अहम काम किया था.   

 

छोटे कणों कणों के गुण धर्म समझने के लिए क्वांटम शब्द का उपयोग किया जाता है. दिवंगत सिंह ने रिसर्च पेपर में कणों के अलग-अलग स्वभाव की वजह के बारे में बताने का प्रयास किया. कणों के अलग अलग स्वभाव क्यों हो जाते हैं?  

 

इस बारे में अभी भी दुनिया के वैज्ञानिकों में कोई एक राय नहीं बन सकी है. पचास साल पहले गणितीय आधार पर क्वांटम मैकेनिक्स (चक्रीय वृद्धि या कणों में वृद्धि का स्वभाव) पर इतनी गहराई से सोच रखने वाले चंद वैज्ञानिकों में से वे एक थे.  दरअसल  क्वांटम मैकेनिक्स कणों की  प्रकृति को समझने का जरिया है. उनका रिसर्च इतना बहुआयामी था कि उसमें ऑप्टीमाइजेशन पर भी फोकस किया. बताया कि असीमित को सीमित और असंख्य को  बेहद कम किया जा सकता है.  इसी थ्योरी के आधार पर दुनिया का औद्योगिक परिदृश्य बदल रहा है. इसमें किसी भी यूनिट के उत्पादन, रोजगार और निवेश को आकलन के जरिये किफायती बनाया जा सकता है. कुल मिला कर  उनकी सोच में गणित के जरिये अर्थव्यवस्था को सुव्यवस्थित करना भी शामिल था. 

 



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