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क्या ऑस्ट्रेलिया में 'करतब' दिखा रही है पिंक बॉल, बल्लेबाजों के उड़े हुए हैं होश

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नई दिल्ली: एडिलेड में गुलाबी गेंद से ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच डे-नाइट टेस्ट मैच खेला जा रहा है। इस डे-नाइट टेस्ट मैच में पिंक बॉल से मेजबान टीम के सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर ने तिहरा शतक जड़ा है। उधर, पाकिस्तान टीम के ज्यादातर बल्लेबाजों ने गुलाबी गेंद से परेशानी का सामना किया। इसके पीछे कारण ये भी है कि ये गुलाबी गेंद अपने करतब दिखा रही है।

दरअसल, स्पीड गन से एक ही गेंद की दो अलग-अलग स्पीड निकाली गई हैं। आमतौर पर स्पीड गन गेंद की उस गति को मापती है जब गेंद गेंदबाज के हाथ से निकले और बल्लेबाज के बल्ले से लगे या फिर विकेट के पीछे जाए, लेकिन एडिलेड टेस्ट मैच में कुछ अलग देखने को मिला है। गुलाबी गेंद वैसे भी बल्लेबाजों के लिए मुश्किलें पैदा करती है, लेकिन एडिलेड टेस्ट मैच में देखा गया है कि गेंद पिच पर गिरने के बाद कम गति से बल्ले पर आ रही है।

काफी कम हो जाती है गेंद की गति

ऑस्ट्रेलिया बनाम पाकिस्तान मैच में लाइव कॉमेंट्री कर रहे पूर्व क्रिकेटर और एक्सपर्ट ने इस का अध्ययन किया है और बताया है कि ऑस्ट्रेलियाई टीम के तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क 141 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी कर रहे हैं, लेकिन गेंद टप्पा खाने के बाद करीब 20-25 kmph धीमी हो जा रही है। आदतन ऐसा होता है, लेकिन कूकाबुरा की पिंक बॉल के साथ ऐसा कुछ ज्यादा हो रहा है, जिससे बल्लेबाज मुश्किल में हैं।

स्पिनरों के साथ भी हो रहा है ऐसा

दरअसल, पहले सिर्फ गेंद की गति को मापा जाता था, लेकिन इस सीरीज में पहली बार गेंद की उस गति को मापा जा रहा है, जिसमें गेंद गिरने के बाद बल्ले पर कितनी गति से आई। दूसरे टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज ही नहीं, बल्कि स्पिन गेंदबाजों के साथ भी ऐसा हुआ है। नाथन लायेन की गेंद 90 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से की गई थी, लेकिन गेंद बल्ले पर करीब-करीब 80 kmph की रफ्तार से पहुंची, जो बेहद चौंकाने वाली बात है।

उधर, दिग्गज क्रिकेट एक्सपर्ट हर्षा भोगले ने सोशल मीडिया के जरिए बताया है कि गेंद की गति पिच की प्रकृति पर भी भी निर्भर करती है। इसके अलावा गेंद कितना रफ है। इससे भी गेंद की गति पर असर पड़ता है। गेंद रिलीज होने के बाद गति वायु प्रतिरोध के कारण भी कम हो जाती है। वहीं, जब गेंद लैंड करती है तो घर्षण के कारण भी गेंद बल्ले पर धीमे आती है। मेरा मानना है कि पिंक बॉल से ज्यादा ऐसा होता है, क्योंकि इसमें ज्यादा चमड़ा लगा होता है और ज्यादा ग्लॉस (चमक) भी होती है।

गेंद की गति कम होने की बहस सोशल मीडिया पर भी छिड़ गई है। खेल प्रशंसकों और एक्सपर्ट्स का कहना है कि शायद इससे गेंदबाजों को दिक्कत हो सकती है। इसके अलावा इससे युवा गेंदबाजों की मानसिकता प्रभावित हो सकती है। ऐसे में या तो सतह को सही बनना होगा या फिर गेंद में कुछ जरूरी बदलाव करने होंगे। 



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