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मुजफ्फरपुर आश्रय गृह मामले के सरगना ब्रजेश ने सरकारी धन निजी हितों के लिए हस्तांतरित किया : ED

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नयी दिल्ली : बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में स्थित एक आश्रय गृह में कई लड़कियों से यौन उत्पीड़न मामले के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर ने बच्चों के कल्याण के लिए मिले सरकारी कोष का हस्तांतरण निजी लाभ एवं गैरकानूनी गतिविधियों के लिए किया था. प्रवर्तन निदेशालय की जांच में यह बात सामने आयी है. संघीय जांच एजेंसी ने ब्रजेश ठाकुर, उसके परिवार के सदस्यों व अन्य के खिलाफ पिछले साल अक्टूबर में धन शोधन का आपराधिक मामला दर्ज किया था.

ब्रजेश ठाकुर के गैर सरकारी संगठन सेवा संकल्प विकास समिति की ओर से चलाये जा रहे आश्रय गृह में नाबालिग लड़कियों के यौन उत्पीड़न की खबर सामने आने के बाद यह मामला दर्ज किया गया था. मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय की जांच में कहा गया है, ‘‘गैर सरकारी संगठन के बैंक खातों के जरिये सीधे ठाकुर और उसके परिवार के सदस्यों के खाते में उनके निजी इस्तेमाल के लिए बड़े पैमाने पर धन हस्तांतरित किया गया था.'' पीटीआई को मिली जांच रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘इससे यह स्पष्ट होता है कि बच्चों के कल्याण के लिए सरकार और अन्य स्रोतों से प्राप्त धनराशि को ठाकुर ने छुपाया, हस्तांतरित किया और चुराया.''

जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि यह ‘‘धन शोधन का एक अनोखा मामला'' है जहां बच्चों के कल्याण में इस्तेमाल होने वाले धन को हस्तांतरित किया गया, विभिन्न खातों के माध्यम से बांटा गया और व्यक्तिगत हित के लिए उसका इस्तेमाल किया गया. इसमें कहा गया है कि गैर सरकारी संगठन के खातों से ठाकुर और उसके परिजनो के खातों में धन का निर्बाध रूप से हस्तांतरण किया गया. जांच रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘इससे यह स्पष्ट होता है कि ठाकुर ने निजी संपत्ति के तौर पर गैर सरकारी संगठन को प्रबंधन और इस्तेमाल किया तथा निजी हितों के लिए उसका कोष चुराया.''

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है, ‘‘ठाकुर ने संगठन के बैंक खातों से अन्य लोगों के खातों में धन का अवैध रूप से हस्तांतरण किया जिन्होंने बाद में बिना कोई निशान छोड़े नकद राशि अपने बैंक खाते से निकाल कर ठाकुर को सुपुर्द कर दिया. एक विशिष्ट उदाहरण में एजेंसी ने पाया कि गैर सरकारी संगठन के खातों से धन निकाल कर उसका इस्तेमाल ‘‘सीधे'' उसके बेटे के मेडिकल कालेज की फीस चुकाने में किया गया. इसमें कहा गया है, ‘‘इससे यह स्थापित होता है कि ठाकुर और उसके परिवार के सदस्यों ने एनजीओ के कोष को व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए अदला-बदली कर उसका हस्तांतरण किया.'' इसमें कहा गया है कि ठाकुर और उसके परिजनों ने गैरसरकारी संगठन का इस्तेमाल धन शोधन के माध्यम के तौर पर किया.

जांच एजेंसी ने आयकर विभाग के उस आदेश पर भी भरोसा किया, जिसमें पिछले साल 14 अगस्त को गैर सरकारी संगठन के पंजीयन एवं कर छूट को रद्द कर दिया था, क्योंकि विभाग ने यह पाया कि संगठन ‘‘अपने घोषित उद्देश्यों से पूरी तरह से भटक गया है और अवैध गतिविधियों में शामिल है.'' धन शोधन रोकथाम अधिनियम के तहत मामले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय ने यह भी पाया कि ठाकुर और उनके परिवार ने आयकर रिटर्न में अपनी संपत्ति एक करोड़ 97 लाख से कम बतायी थी, जबकि उनके पास लगभग साढ़े पांच करोड़ रुपये की संपत्ति है.



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