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फिल्‍म देखने से पहले जानें कैसी है फिल्‍म 'मर्दानी 2'

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मुम्बई : सीक्वल फिल्मों के दौर में बेसिरपैर की कॉमेडी फिल्मों की फ्रेंचाइजी साल दर साल विकसित हो रही है. ऐसे में दौर में फ़िल्म मर्दानी की फ्रेंचाइजी स्वागतयोग्य है. शिवानी शिवाजी रॉय जैसा  सशक्त महिला किरदार मौजूदा  समय की ज़रूरत कहा जाए तो गलत न होगा.

फ़िल्म की कहानी की बात करें 2014 में रिलीज फ़िल्म मर्दानी का सीक्वल मर्दानी 2 हैं. पहली सीक्वल फ़िल्म चाइल्ड ट्रैफिकिंग पर थी जिसमें मासूम बच्चियों को देह व्यापार में धकेले जाने की कहानी थी. जिनके पीछे एक खरतनाक सोच रखने वाला युवा मास्टरमाइंड था.

इस बार कहानी एक साइको किलर की है जो लड़कियों को रेप करने के बाद उन्हें दर्दनाक मौत देता है. क्या शिवानी शिवाजी रॉय इस बार भी इस खरतनाक अपराधी को उसके अंजाम तक पहुँचा पाएगी यही फ़िल्म की कहानी है. पिछली फिल्म की तरह यहां भी विलन तक पहुँचने में चूहे बिल्ली का खेल है.

फ़िल्म रेप जैसे जघन्य मुद्दे से डील करती यह कहानी सस्पेंस और थ्रिलर से लबरेज है. कहानी में कुछ खामियां भी रह गयी. खासकर सेकंड हाफ पहले हाफ के मुकाबले कुछ कमज़ोर रह गया है. कहानी में कुछ बातों को बढ़ा चढ़ाकर दिखाया गया है जिस पर विश्वास नहीं होता है कि आखिरकार इतनी कम उम्र में भी वो साइको रेपिस्ट किलर किस तरह से पुलिस के नाक के नीचे इतने अपराध करता रहा. फ़िल्म के कई दृश्य झकझोर कर रख देते हैं.

अभिनय की बात करें रानी मुखर्जी ने एक बार फिर अपने किरदार में जानदार परफॉर्मेंस दी है।वर्दी पहनी हुई शिवानी शिवाजी रॉय का किरदार और निखरकर सामने आया है.

विशाल जेठवा ने सीरियल किलर के तौर पर दमकार अभिनय किया है. वो अपने किरदार से दर्शकों के बीच नफरत पैदा करने में कामयाब रहे हैं जो एक खलनायक की उपलब्धि है।बाकी के किरदारों ने कहानी में अपना अच्छा सहयोग दिया है. फ़िल्म के संवाद कहानी के अनुरूप है. हिस्सा वाला रानी का संवाद अच्छा बन पड़ा है. फ़िल्म का बैकग्राउंड स्कोर कहानी को सशक्त बनाता है. इस इंटेंस स्टोरीज में सांग का भी असरदार तरीके से इस्तेमाल हुआ है. फ़िल्म के दूसरे पहलू भी अच्छे हैं. 



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