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ट्रेडिशनल कपड़े काजोल को है बहुत पसंद, पति अजय देवगन को लेकर कही ये बात

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हालिया रिलीज फिल्म 'तानाजी द अनसंग वारियर' अभिनेत्री काजोल की पहली पीरियड फिल्म है. काजोल कहती हैं कि इससे पहले भी उन्हें दो पीरियड फिल्में ऑफर हुई थीं, लेकिन उनके लिए जॉनर से ज्यादा कहानी, किरदार और निर्देशक मायने रखते हैं. काजोल से हुई खास बातचीत.

-तानाजी आपकी पहली पीरियड फिल्म है. पहला मराठी किरदार सावित्री मालुसरे के लिए कितना होमवर्क करना पड़ा

मुझे इसके लिए ज्यादा तैयारी नहीं करनी पड़ी, क्योंकि निर्देशक ओम पिछले पांच वर्षों से इस पर काम कर रहे थे. उन्होंने बढ़िया रिसर्च वर्क किया था. उस पीरियड के बारे में काफी कुछ लिखा गया है, लेकिन किरदारों के बारे में ज़्यादा नहीं. 500 साल पुरानी कहानी है. मनोरंजन के लिए थोड़ी लिबर्टी ली गयी है, लेकिन इतिहास के तथ्य को ध्यान में रखा गया है. जहां तक किरदार की बात है तो सावित्री मालुसरे एक मजबूत नारी का किरदार है. उसमें बताया गया है कि तब की औरतें सबकुछ करती थीं. तब इतना सोशल प्रेशर नहीं था. उसने अपने सारे फैसले खुद लिये.

-आपके लिए फिल्म में सबसे खास क्या रहा?

सावित्री का किरदार बहुत सशक्त है और कहानी भी. इसमें मैंने वही नव्वारी साड़ी पहनी है, जो अपनी शादी में 20 साल पहले पहनी थी. उस वक्त भी नथ के साथ पहनी थी. मैंने अपनी नानी को, उनकी मां को और फैमिली में कई अन्य महिलाओं को शादी व किसी फंक्शन में नव्वारी साड़ी पहनते देखा है. हां, तानाजी के टाइम पीरियड में नव्वारी साड़ी को अलग अंदाज में पहना जाता था. उस स्टाइल को पर्दे पर उतारने के लिए हमने 75 वर्षीया एक बुजुर्ग महिला आशा ताई को बुलाया था, जो मराठी फिल्मों में ब्लैक एंड वाइट जमाने से साड़ी पहनाती आयी हैं. मुझे नव्वारी स्टाइल में इसे पहनाने में पौना घंटा लग जाते थे.

-इन दिनों पीरियड फिल्में बहुत बन रही हैं. इस ट्रेंड पर क्या कहेंगी?

ऐसी फिल्मों का आना जरूरी हैं, जो हमें देखभक्ति सिखाती हैं. ये बताती हैं कि हमारे लिए इतने महान लोगों ने कितना कुछ किया है. भारत के नक्शे को बदलने में तानाजी का अहम योगदान है. ये सब बातें जज्बे से भर देती हैं. मेरे नानाजी ने भारत में बैंक की पहली शुरुआत की थी, तो ये सब खुशी देता है.

-आपके पति अजय देवगन की यह 100 वीं फिल्म है. कैसा लगा?

हमें पहले से पता नहीं था कि उनकी सौंवी फिल्म है. बस यह संयोग है कि तानाजी उनकी 100वीं फिल्म है. अजय की जर्नी शानदार रही है. 100वीं फिल्म होने पर मैं जब सोशल मीडिया पर लिखने बैठी, तो इतने यादगार किरदार और फिल्में सामने आती गयीं कि मैं लिखते-लिखते थक गयी. हमारी जोड़ी 10 साल बाद इसमें दिखी है. एक को-स्टार के तौर पर अजय में मैंने बहुत बदलाव देखा है, साथ ही जबरदस्त ग्रोथ देखा है. एक एक्टर के तौर पर भी और एक इंसान के तौर पर भी. उसने हर तरह का सिनेमा किया है, वह चाहे कॉमिडी हो, एक्शन हो, रोमांस हो या थ्रिलर. सब अपने में लाजवाब है.

-आपकी और अजय की शादी इंडस्ट्री में मिसाल है. आपकी सफल मैरिड लाइफ का राज क्या है?

आपको करीबी रिश्तों में समझने की जरूरत है. आपको हर दिन अपने खास रिश्तों में कुछ-न-कुछ बीज बोना पड़ता है. जैसे आप पौधे को रोज पानी देते हो पेड़ बनने के लिए और पेड़ बनने के बाद भी आपको उसका पूरा ध्यान रखना पड़ता है. ऐसा ही रिश्तों के साथ भी है. थोड़ा-सा एक्स्ट्रा केयर तो करना ही पड़ेगा. अजय और मैं दोनों ही इस बात का ध्यान रखते हैं. फैमिली, बच्चे और काम हम दोनों की यही दुनिया है.

-अजय के साथ कैमरे पर भी आपकी जोड़ी सराही जाती है?

हमने ऑन स्क्रीन 10 फिल्में की हैं और ऑफ स्क्रीन भी ढेर सारा काम साथ में किया है, तो हमेशा हम कैमरे के सामने भी सहज होते हैं. मैं हमेशा यह बात कहती हूं कि अजय सेट पर 50 प्रतिशत एक्टर और 50 प्रतिशत डायरेक्टर हैं. कभी-कभी सीन के बीच में खुद ही बोल देते हैं- मुझे लगता है कि तू एक और शॉट दे दे, क्योंकि इस सीन में तेरा एक्सप्रेशन कुछ एक्स्ट्रा हो सकता है. मैं चाहती हूं कि मेरा हर को-एक्टर ऐसा ही हो.

-आप इंडस्ट्री में दो दशक से ज़्यादा समय बिता चुकी हैं. बदलते वक्त के साथ आप कितना बदली हैं?

मैं सेट पर बहुत सहज होती हूं, आज भी पहले की तरह. हां, कैमरे के सामने काम करने का तरीका जरूर बदल गया है, क्योंकि दर्शक बदल गये हैं. इतना कुछ उन्होंने देख लिया है. जर्मन फिल्में, कोरियन फिल्में, आयरिश फिल्में. आप पुराने फॉर्मूले नहीं आजमा सकते. इस हिसाब से खुद को चेंज करने की कोशिश करती हूं.

-'तानाजी' से पहले आपको पीरियड फिल्म आफर हुई?

हां, मुझे पहले भी दो बार पीरियड फिल्म आफर हुई है, लेकिन किरदार, कहानी और निर्देशक तीनों अच्छे होने चाहिए. मैं यह नहीं सोचती कि मुझे इस तरह का किरदार या फलां जॉनर करना है. जो मुझे आफर हुआ है, उसे मैंने बेस्ट करने की कोशिश की है. मैंने एक किताब पढ़ी थी, जिसमें एक लड़की की जर्नी को 20 से 60 की उम्र तक लिखा गया था. मैं वैसा कुछ पर्दे पर करना चाहूंगी. 20 की उम्र तो अब नहीं कर पाऊंगी. कहानी 40 से 80 की उम्र तक दिखाये, तो भी मुझे चलेगा.

-आप फिल्म प्रोमोशन के मौके पर हर जग साड़ी में दिखी हैं. क्या यह भी इसी का हिस्सा था?

हां, एक वजह यह भी है, लेकिन मुझे ट्रेडिशनल कपड़े पहनना बहुत पसंद हैं. वैसे हम भारतीय महिलाओं में साड़ी बहुत फबती है, फिर चाहे हमारा रंग अलग हो या फिर साइज.

-अक्सर लोग कहते हैं कि बुढ़ापे में हमारे मां-बाप हमारे बच्चे बन जाते हैं. आप मां तनुजा का कितना ख्याल रखती हैं?

मैं नहीं मानती कि वे बच्चे बन जाते हैं, लेकिन हमें अपने माता- पिता का ख्याल जरूर रखना चाहिए. जितना हम उनको संभालते हैं, उससे कहीं ज़्यादा उन्होंने हमें बचपन में संभाला है. माता-पिता ने जितना हमारे लिए किया है, उतना हम जिंदगी में कर ही नहीं सकते. मेरी मां (तनुजा) ने मुझे पालने में जितना कुछ किया है, मैं उसका एक परसेंट भी नहीं कर सकती. जब हम उन्हें बच्चे की तरह देखने लगते हैं, तो हमारा नज़रिया बदल जाता है. मैं अपनी मां को कभी अपने बच्चे की तरह नहीं देखती. वह मेरी मां ही हैं, जो आज भी मुझे कुछ-न-कुछ सीखा जाती हैं. डैड ने भी मुझे हमेशा सिखाया है.

-आपकी मां तनुजा का फिल्म में आपके लुक पर क्या कहना है?

मां बहुत खुश हैं. उनका कहना है कि नव्वारी साड़ी में मैं अपनी परनानी की तरह लगती हूं. मैंने सोशल मीडिया पर मेरे मामा की शादी की एक तस्वीर भी शेयर की, जिसमें मेरी परनानी औऱ नानी ने नव्वारी साड़ी पहनी हुई है. उस तस्वीर को देखकर कई समानता महसूस होती है.



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