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देश भर में महिलाओं का जीवन पुरुषों से अधिक, जानें झारखंड में लोगों के कम आयु की वजह

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रांची : सुंदर प्रकृति के बीच रहनेवाले झारखंड के लोग जीने की उम्र के मामले में बहुत भाग्यशाली नहीं हैं. सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) की रिपोर्ट के आधार पर नीति आयोग के पास जो आंकड़े हैं, उनके मुताबिक कुल 21 राज्यों की सूची में झारखंड का स्थान लाइफ एक्सपेंटेंसी (जन्म से मृत्यु तक की जीवन प्रत्याशा) के मामले में 16वां है. 


वर्ष 2010 से 2014 के आंकड़ों के आधार पर तैयार इस रिपोर्ट के मुताबिक झारखंड के लोगों की औसत उम्र (66.6 वर्ष) राष्ट्रीय औसत (67.9 वर्ष) से 1.3 वर्ष कम है. यहां पुरुषों की औसत उम्र 66.2 वर्ष तथा महिलाओं की 66.9 वर्ष है. दरअसल झारखंड के अलावा छह अन्य राज्यों (राजस्थान, अोड़िशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश व असम) के निवासियों की अौसत उम्र भी राष्ट्रीय अौसत से कम है.


जीवन प्रत्याशा के मामले में झारखंड के लोगों की औसत उम्र अपने दो पड़ोसी राज्यों बिहार (68.1 वर्ष) व प.बंगाल (70.2 वर्ष) से कम तथा दो अन्य पड़ोसी राज्यों ओड़िशा (65.8 वर्ष) व छत्तीसगढ़ (64.8) से अधिक है. इधर केंद्र सरकार द्वारा जारी नेशनल हेल्थ प्रोफाइल-2019 के अनुसार जीवन जीने का राष्ट्रीय अौसत बढ़ा है. पर झारखंड सहित कई अन्य राज्यों का ब्योरा इसमे उपल्बध नहीं है. 


केरल सबसे बेहतर व असम बदतर : जीवन प्रत्याशा के मामले में केरल देश का सबसे बेहतर राज्य है. यहां पुरुषों की औसत उम्र 72 वर्ष तथा महिलाओं की 77.8 वर्ष है. वहीं असम में लोगों का जीवन सबसे कम है.  यहां पुरुष औसतन 62.7 वर्ष जबकि महिलाएं 65.5 वर्ष जीती हैं.


देश भर में महिलाओं का जीवन पुरुषों से अधिक


महिलाओं की उम्र अधिक 


देश भर के सभी राज्यों में महिलाओं की उम्र पुरुषों से अधिक है. स्वास्थ्य निदेशालय, झारखंड में चाइल्ड हेल्थ प्रभारी डॉ अजीत के अनुसार महिलाओं की उम्र पुरुषों से अधिक होने का सबसे बड़ा कारण पुरुषों का एक्सपोजर टू डेंजर (जोखिम वाले कार्य या वातावरण) अधिक होना है. 

यानी पुरुष कामकाज के दौरान तथा स्वभावगत ज्यादा जोखिम लेते हैं तथा पुरुषों की मौत का एक बड़ा कारण विभिन्न तरह की दुर्घटनाएं है. दूसरा कारण बच्चियों को मिली प्रकृति प्रदत्त शक्ति है. डॉ अजीत के अनुसार यदि एक नवजात बच्चे व बच्ची को बिना दूध के रखा जाये, तो बच्चे की मृत्यु पहले होगी, बच्ची की बाद में. तीसरा कारण बेहतर शिक्षा व जागरूकता के कारण महिलाओं में बढ़ रही स्वास्थ्य जागरूकता भी उनकी जीवन प्रत्याशा अधिक होने का एक कारण है.


विभिन्न राज्यों में लोगों की अौसत उम्र (वर्ष में)


राज्य   पुरुष   महिला   कुल

केरल   72.0   77.8   74.9

दिल्ली   72.0   74.7   73.2

जम्मू-कश्मीर   70.9   74.9   72.6

उत्तराखंड   69.1   74.5   71.7

हिमाचल   69.3   74.1   71.6

पंजाब   69.7   73.8   71.6

महाराष्ट्र   69.9   73.6   71.6

तमिलनाडु   68.6   72.7   70.6

प.बंगाल   68.9   71.6   70.2

कर्नाटक   66.9   70.8   68.8

गुजरात   66.6   71.0   68.7

राज्य   पुरुष   महिला   कुल

हरियाणा   66.3   71.3   68.6

आंध्र प्रदेश   66.3   70.8   68.5

बिहार   67.8   68.4   68.1

राजस्थान   65.5   70.2   67.7

झारखंड   66.2   66.9   66.6

अोड़िशा   64.7   67.1   65.8

छत्तीसगढ़   63.3   66.3   64.8

मध्य प्रदेश   62.5   66.0   64.2

उत्तर प्रदेश   62.9   65.4   64.1

असम   62.7   65.5   63.9

भारत   66.4   69.6   67.9


झारखंड में लोगों के कम आयु की वजह


विशेषज्ञों के अनुसार झारखंड में कुपोषण एक बड़ी समस्या है. देश भर में कुपोषित व कमजोर बच्चों (मेल व फीमेल दोनों) की सबसे अधिक संख्या झारखंड में है. कांप्रिहेंसिव नेशनल न्यूट्रिशनल सर्वे (सीएनएनएस) रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में जन्म से लेकर चार वर्ष तक के कुपोषित बच्चों की संख्या 42.9 फीसदी है. 


वहीं इसी वर्ग के कमजोर (वेस्टेंग) बच्चे 29.1 फीसदी है. यह दोनों संख्या देश भर के 30 राज्यों की तुलना में सर्वाधिक है. बच्चों के कुपोषित होने का बड़ा असर उनकी अायु पर पड़ता है. दूषित जल (फ्लोराइड व अार्सेनिक युक्त) के इस्तेमाल सहित मलेरिया, सिकल सेल व अन्य बीमारियों का नकारात्मक असर भी खास कर झारखंड की स्थानीय आबादी पर है.



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