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जापानी कंपनियां झारखंड में तलाश रहीं निवेश के ठिकाने, उद्योग सचिव ने दिया न्योता

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जापान ने झारखंड में निवेश के इरादे जताए हैं। जापान की दिग्गज बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी झारखंड में निवेश के ठिकाने तलाश रही हैं। हफ्ते भर के अंदर जापान सरकार के अधिकारियों ने दो बार झारखंड के उद्योग सचिव प्रवीण कुमार टोप्पो के साथ वीडियो क़ॉन्फ्रेंसिंग कर संभावना टटोली है। उद्योग सचिव ने जापान की बहुराष्ट्रीय कंपनी निप्पॉन क़ॉरपोरेशन को वार्ता के दौरान झारखंड में निवेश का न्योता भी दिया। जापान सरकार की ओर से अंतर्राष्ट्रीय निवेश का प्रबंधन करने वाली एजेंसी जेट्रो यानी जापान एक्सटर्नल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन झारखंड में निवेश की रुचि दिखा रही है। जेट्रो के प्रमुख ने 22 जुलाई को उद्योग सचिव के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर झारखंड की उद्योग नीति के प्रमुख पहलुओं को जाना। 29 जुलाई को जापान केंद्रित बहुराष्ट्रीय कंपनी निप्पॉन स्टील कॉरपोरेशन के शीर्ष प्रबंधन के हिडेकी ओगावा ने झारखंड के उद्योग सचिव से बातचीत की। इस मौके पर जापान की ट्रेड पॉलिसी के उप महानिदेशक ओसामु ओनोडेरा भी मौजूद थे। हिडेकी ओगावा ने झारखंड में स्टील सेक्टर के बारे में जानकारी ली। उद्योग सचिव प्रवीण टोप्पो ने ओगावा को झारखंड में हरसंभव सहयोग का वादा किया। इस वार्ता में भारत सरकार के विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी शामिल थे। झारखंड के स्टील सेक्टर पर है नजर : जापान सरकार और जापानी कंपनियों की नजर झारखंड के स्टील सेक्टर पर है। इसका सबसे बड़ा कारण दुनिया के बड़े इस्पात संयंत्रों में से दो जमशेदपुर स्थित टिस्को और बोकारो स्थित सेल के स्टील प्लांट की झारखंड में मौजूदगी है। यहां लौह अयस्क के पर्याप्त भंडार भी हैं। इसका भी फायदा जापानी कंपनियों को मिल सकता है। इसके अलावा पारादीप और हल्दिया के बंदरगाह के सहारे निर्यात-आयात की भी प्रबल संभावना है। जापानी कंपनियां झारखंड में पहले से मौजूद किसी बड़ी स्टील कंपनी के साथ साझेदारी की संभावना पर भी विचार कर सकती है। भारत सरकार भी झारखंड के स्टील सेक्टर में निवेश के लिए पहल कर रही है। बोकारो में पहले ही स्टील क्लस्टर बनाने की घोषणा की जा चुकी है। इसके लिए बोकारो स्टील प्लांट के उपयोग में नहीं आ रही हजारों एकड़ जमीन भी आरक्षित की जा चुकी है। हालांकि, स्थान का चयन निवेश करने वाली कंपनियों के शीर्ष प्रबंधन पर निर्भर करेगा। चीन के निवेश को झारखंड में मोड़ने की तैयारी : कोरोना काल के बाद चीन और जापान की ऐतिहासिक तल्खी थोड़ी और बढ़ गई है। ऐसे में जापानी कंपनियां चीन के निवेश को अपने अनुकूल देशों में मोड़ने की तैयारी कर रही है। औद्योगिकरण के लिहाज से झारखंड उनके लिए माकूल जगह हो सकता है। ऐसे में झारखंड सरकार भी इस अवसर का लाभ उठाने की योजना बना रही है।



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