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Heart Attack Prevention : शील्डेड स्टेम सेल से दिल की मरम्मत कई गुना तेजी से होगी- रिसर्च

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नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। रफ्तार भरी इस मॉडर्न जिंदगी में लाइफस्टाइल से संबंधित बीमारियां पूरी दुनिया के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। ऐसे में हार्ट अटैक एक ऐसी बीमारी है, जिससे इनसान को हमेशा अलर्ट रहना चाहिए । एक बार किसी को हार्ट अटैक हो जाए तो वह इनसान जिंदगी भर जोखिम में रहता है। उसे हमेशा यह डर रहता है कि किसी तरह का तनाव न लें, ज्यादा फिजिकल वर्क न करें। उसे खाने-पीने में कई चीजों का परहेज हमेशा रखना होता। दरअसल, जब हार्ट अटैक आता है तो दिल की कोशिकाएं बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इन्हें अपने पुराने रूप में आने में बहुत समय लगता है। इस बीच अगर दोबारा अटैक आ जाए तो यह बेहद घातक होता है। ऐसे में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक ईजाद की है, जिसमें शिल्डिंग (सुरक्षा कवच से घिरे) स्टेम सेल के माध्यम से मरीज का इलाज किया जाता है। इस स्टेम सेल से इलाज में दिल की क्षतिग्रस्त कोशिकाएं बहुत तेजी से खुद को सही कर लेती हैं। स्टेम सेल वह बुनियाद सेल यानी कोशिका होती है, जो अपनी जीन इंजीनियरिंग के माध्यम से अन्य कोशिकाओं में विभिन्न तरह की गड़बड़ियों को सही करती है। यह एक तरह से मास्टर कोशिकाएं होती हैं।सुरक्षित भी बन जाती हैं कोशिकाएं बायलर कॉलेज ऑफ मेडीसिन और राइस यूनिवर्सिटी के बायोइंजीनियर ने अपने शोघ में पाया है कि अगर हार्ट अटैक के मरीज को शिल्डेड स्टेम सेल में नए जैव पदार्थ मिला कर दिया जाए, तो दिल की क्षतिग्रस्त कोशिकाएं ढ़ाई गुना तेजी से सही हो जाती है। शोधकर्ताओं ने अपने प्रयोग को साबित करने के लिए मेजेनकाइम स्टेम सेल (एएससी) में कुछ जैव पदार्थ के साथ कैप्सूल की तरह बना दिया। इसके बाद हार्ट अटैक वाले चूहों में इस कैप्सूल को प्रत्यारोपित कर दिया। दूसरी ओर हार्ट अटैक से पीड़ित कुछ अन्य चूहों में बिना शिल्डेड स्टेम सेल के कैप्सूल को प्रत्यारोपित किया गया। शोधकर्ताओं ने चार सप्ताह बाद इन चूहों पर शिल्डेड और नन शिल्डेड स्टेम सेल के असर का विश्लेषण किया। इसके बाद पाया कि जिन चूहों में शिल्डेड स्टेम सेल प्रत्यारोपित किया गया था उनके दिल की क्षतिग्रस्त कोशिकाएं दूसरे समूह के चूहों के मुकाबले ढ़ाई गुना तेज रफ्तार से सही हो गई।बायलर कॉलेज ऑफ मेडिसीन के प्रोफेसर रवि के घांता ने बताया कि अध्ययन में हमने पाया है कि अगर स्टेम कोशिकाओं में कुछ जैविक तत्वों को मिलाकर शिल्डेड कैप्सूल तैयार किया जाए और इसे क्षतिग्रस्त कोशिकाओं के पास प्रत्यारोपित कर दिया जाए तो नए ऊतकों के विकास की उनकी क्षमता ढाई गुना बढ़ जाती है। कोशिकाओं का लंबे समय तक बाहरी तत्वों से सुरक्षित रहना इसकी मुख्य वजह है। यही नहीं, शरीर उन्हें बाहरी तत्व समझकर उनके खिलाफ प्रतिरोधी कोशिकाएं भी पैदा नहीं कर पाता है।



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