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चमड़े के नहीं अब मशरूम से बने जूते-बैग होंगे ट्रेंड सेटर, जानें क्या है इनकी खासियत

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चमड़े से बने जूते, फैशन बैग और कपड़ों का इस्तेमाल ज्यादातर लोग करते है, पर शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि ये सारी चीजें मशरूम से भी बनाई जा सकती हैं। एक अध्ययन में यह दावा किया गया है.कि मशरूम, चमड़े को कड़ी टक्कर दे सकता है। मशरूम को दबाकर और उसे रासायनिक रूप से उसे संसाधित करके उससे चमड़े जैसे एक सख्त पदार्थ का निर्माण किया जा सकता है। ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना विश्वविद्यालय से अध्ययन के सह-लेखक प्रोफेसर अलेक्जेंडर बिस्मार्क ने कहा कि यह वह जगह है जहां मशरूम का इस्तेमाल हैंडबग, कपड़े आदि बनाने में किया जाता है। इसकी खास बात यह है कि ये अंत में बायोडिग्रेडेबल यानी प्राकृतिक तरीके से सड़नशील है। भले ही चमड़ा पिछले कई दशकों से सबसे टिकाऊ और बहुमुखी प्राकृतिक सामग्रियों में से एक बना हुआ है पर कुछ उपभोक्ता जानवरों से मिलने वाले उत्पादों को पहनने में करताते हैं। कई लोग इसके नैतिक प्रभाव और पर्यावरणीय स्थिरता पर सवाल उठा चुके हैं। सिंथेटिक पॉलिमर से उत्पादित चमड़े का विकल्प पर्यावरणीय स्थिरता के संदर्भ में बेहतर है और हाल के वर्षों में इसने बाजर में अपनी काफी अच्छी पकड़ बनाई है। पर्यावरण को नुकसान- दरअसल, सभी पशुओं पर निर्भर उद्योगों के साथ चमड़े का उत्पादन, पर्यावरण के लिए बुरा है। इसके लिए बहुत सारी भूमि और संसाधनों की आवश्यकता होती है और कार्बन डाइऑक्साइड जैसे ग्रीनहाउस गैसों की उच्च मात्रा का उत्पादन होता है संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन के अनुसार वहीं पशुओं पर पूरी तरह से आश्रित चमड़े का क्षेत्र लगभग 14% ग्रीनहाउस उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार है। कवक के निर्माण में प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती है। यह कचरे को उपयोगी सामग्रियों में परिवर्तित करता है और बढ़ते हुए कवक में जमा करके कार्बन को संग्रहीत करता है। प्रोफेसर बिस्मार्क ने कहा 'यह प्रक्रिया काफी सरल है और कारीगरों द्वारा न्यूनतम उपकरण और संसाधनों के साथ पूरा की जा सकती है। अंतिम उत्पाद जानवरों के चमड़े की तरह दिखता है और इसमें समान स्थायित्व है'।



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