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छात्रा को मृत घोषित करने पर अस्पताल में हंगामा

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जामताड़ा: नाला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बुधवार को दसवीं की छात्रा दीया गोस्वामी को मृत घोषित करने के विरोध में पीड़ित परिजनों व ग्रामीणों ने हंगामा खड़ा किया। ग्रामीण चिकित्सक पर लापरवाही का आरोप लगाकर उनके तबादले की मांग कर रह थे। ग्रामीणों का कहना था कि चिकित्सक ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया पर जब उसका शरीर घर ले गए तो उसकी सांसें चल रही थी। दुबारा अस्पताल लाने के क्रम में रास्ते में बच्ची का दम टूट गया। चिकित्सक शुरू में ही ठीक से जांच करते तो बच्ची बच सकती थी। बाद में पुलिस पहुंचकर विरोध को शांत किया। नाला प्लस टू उच्च विद्यालय की चौदह वर्षीय छात्रा दीया बुधवार सुबह नाला गांव के तालाब में अपनी मां व बहन के साथ नहाने गई थी। इसी क्रम में वह तालाब के पानी में डूब गई। मां जब बेटी को नहीं निकाल पाई तो हल्ला करने पर आसपास के लोग पहुंचे और बच्ची को पानी से बाहर निकाला। फिर उसे नाला सीएचसी में भर्ती कराया गया। अस्पताल में चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया। पिता चंदन गोस्वामी समेत अन्य परिजनों का कहना है कि मृतका दीया को जब घर लेकर पहुंचे तो उसकी सांसें चल रही थी। उसे फिर अस्पताल लाने लगे तो रास्ता में उसकी मौत हो गई। परिजनों व ग्रामीणों ने शव ओ लेकर अस्पताल विरोध जताने पहुंच गए। सूचना पाकर पुलिस पहुंची। पुलिस व बीडीओ कौशल कुमार के हस्तक्षेप से मामला को शांत किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि चिकित्सक की लापरवाही से बच्ची का मौत हो गई। चिकित्सक बच्ची को मृत घोषित करने के बजाए अस्पताल में ही रखकर इलाज करते तो बच्ची की जान बच जाती। करीब नौ बजे से बारह बजे तक अस्पताल परिसर में लोग हंगामा करते रहे। ग्रामीण प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ नदिया नंद मंडल पर कार्रवाई करने व स्थानांतरण करने की मांग पर अड़े थे। इस बाबत उपायुक्त व स्वास्थ्य मंत्री को संबोधित ज्ञापन बीडीओ को सौंपा। बताया गया है कि डॉ नदिया नंद मंडल नाला गांव के निवासी हैं। स्थानीय होने के नाते मनमर्जी करते हैं। ग्रामीणों ने मांग की कि 72 घंटे के अंदर स्थानांतरण नहीं हुआ तो आंदोलन होगा। ग्रामीणों के साथ पंकज झा, तापस भट्टाचार्य, गणेश मित्र, सुकुमार राय, विजन राय, सुजन राय, आदि थे।



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