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58 साल के इतिहास में पहली बार बगैर प्रतिमा की होगी दुर्गा पूजा

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जमशेदपुर: लौहनगरी के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक बेल्डीह कालीबाड़ी में इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण शारदीय नवरात्रि पर प्रतिमा नहीं सिर्फ कलश पर ही देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाएगी। पिछले 58 सालों के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा कि कालीबाड़ी में बगैर प्रतिमा के दुर्गा पूजा संपन्न हाेगी। मंदिर के प्रमुख मोनू भट्टाचार्य ने बताया कि इस वर्ष शारदीय नवरात्रि के पहले दिन परंपरा के अनुसार रीति-रिवाज से देवी दुर्गा की पूजा-अर्चना के लिए कलश स्थापना किया गया। शनिवार रहने के कारण परंपरा के मुताबिक मंदिर में कुछ श्रद्धालु देवी दर्शन-पूजन को पहुंचे थे। नवरात्र के कलश पूजा में बाहर के किसी भी श्रद्धालु को शामिल नहीं कराया जा रहा है। मंदिर के पुजारी ही पूजा संपन्न करा रहे है। इसमें पहले दिन जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो शामिल हुए। 1962 से हो रही देवी दुर्गा की मूर्ति पूजा 1932 में निर्मित बेलडीह कालीबाड़ी में वर्ष 1962 से देवी दुर्गा की मूर्ति पूजा की जा रही है। इस दौरान ऐसा कभी नहीं हुआ कि दुर्गा पूजा के दौरान मंदिर में प्रतिमा न बनी हो। शारदीय नवरात्रि के दौरान यहां पहले दिन प्रतिपदा पर कलश स्थापित कर देवी दुर्गा की आराधना शुरू की जाती है। बेल्डीह कालीबाड़ी में पहले 18 फुट ऊंची प्रतिमा का निर्माण कराया जाता था। पिछले वर्ष मंदिर में 11 फुट की दुर्गा प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की गई थी। इस वर्ष कोरोना महामारी के कारण मंदिर में देवी दुर्गा की प्रतिमा का निर्माण नहीं कराया जा रहा है।



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