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सर्दी में यहां पानी के लिए छूट रहे पसीने, डाड़ी व चुआ से बुझ रही तीन सौ ग्रामीण की प्यास

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धनबाद: पूर्णाटांड़ गांव में पेयजल की काफी गंभीर समस्या है। लगभग तीन सौ की आबादी वाले इस गांव में पेयजल के लिए वर्तमान में एक भी चापानल नहीं है ग्रामीण पेयजल के लिए खेतों के बीच बने डाड़ीचुआ के पानी का प्रयोग करते हैं जो दूषित जल होता है। लगभग एक वर्ष पूर्व गांव में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पंचायत फण्ड के लगभग ढाई लाख रुपये से सोलर ऊर्जा संचालित पानी टंकी लगाने का कार्य किया गया। जिससे ग्रामीणों को उम्मीद बंधी की गांव में पेयजल संकट समाप्त होगा। परंतु यह पानी टंकी पेयजल संकट दूर करने के लिए नहीं बल्कि सरकारी राशि का बंदरबांट करने के लिए लगाया गया था। जो एक वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक चालू ही नहीं हुआ। जबकि उसके पूरे राशि की निकासी हो चुकी है। और कार्य के नाम पर केवल एक टंकी कार्यस्थल पर लगाया गया है। ना ही सोलर प्लेट और ना ही मशीन को लगाया गया। इस बारे में गांव के ग्रामीण श्रीलाल टुडू बताते हैं कि जिस जगह पर पानी टंकी लगाया गया है। वहां बहुत पुराना चापानल था जो बंद हो गया था उसी में सोलर ऊर्जा संचालित पानी टंकी लगाया जा रहा था। लेकिन बोरिंग का गढ्ढा बंद हो गया था जिसके कारण मशीन नही लग सका और उस समय से वैसे ही पड़ा हुआ है। गांव के लोग डांड़ी चुआ का पानी पीने को मजबूर हैं।



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