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आजादी के 74 साल बाद भी स्वास्थ्य सेवाओं से महरूम वनवासी, एंबुलेंस के अभाव में खटोली से ढोते मरीज

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पहाड़ी पर बसे रोहतासगढ़ (Rohtas Fort) पंचायत के आधा दर्जन से अधिक गांवों के लोग आजादी के 74 वर्षों बाद भी स्वास्थ्य सेवाओं महरूम हैं। बभन तलाव, ब्रह्म देवता, नागा टोली, चाकडीह, कछुअर, नकटी भवनवां आदि टोलों से आज भी मरीज को स्वजन खटोले में लेकर पैदल ही इलाज के लिए पीएचसी रोहतास या अन्य निजी अस्पतालों में ले जाते हैं। यहां तक कि प्रसव के लिए आई महिला को भी बच्चा के साथ खटोले में ले जाया जाता है। सरकारी एंबुलेंस की भी सुविधा मुहैया नहीं होने से कई बार इलाज में देरी होने के चलते मरीज की जान भी चली जाती है। मरीजों के लिए मजबूरी है 1500 फीट की चढ़ाईकिसी के बीमार होने पर इलाज के लिए स्वजन खाट पर लादकर लगभग 1500 फीट की ऊंचाई से नीचे उतरते हैं और फिर वापस उसी तरह मरीजों की जान जोखिम में डालकर ऊपर पहाड़ी पर स्थित अपने गांव ले जाते हैं। बभन तलाव गांव निवासी बबन यादव के अनुसार उन्होंने अपनी पत्नी को प्रसव के लिए खटोले पर लादकर एक निजी अस्पताल में लाया था और उसी तरह वापस अपने गांव भी ले गए।



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