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बिन बोले बता रहीं जिंदगी जीने का सलीला, सामान्य लोगों के साथ काम कर रही मूक बधिर युवतियां

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दिव्यांगता अभिशाप नहीं, बल्कि समाज से हटकर कुछ अलग करने का जज्बा पैदा करता है। इसे लेकर जिंदगी को कोसने के बजाय उसके साथ जीने का सलीका सीखना चाहिए। भगवान ने हर बच्चे को अलग काबलियत से नवाजा है। बस जरूरत है उस काबलियत को निखारने की। अगर समाज का सही साथ मिले तो मूक-बधिर भी आसमान छू सकते हैं। सीतापुर रोड के त्रिवेणी नगर की रहने वाली जूफिया का इशारों में यह कहना भले ही आम लोगों के समझ से परे हो, लेकिन अपने जैसे लोगों को प्रेरित जरूर करता है। कौशल विकास योजना के तहत छह महीने के कोर्स के बाद जूफिया अब एक मल्टीनेशन कंपनी में सेल्स विभाग में काम करती हैं। अकेली जूफिया ही नहीं अलीगंज की रागिनी भी एक शापिंग माल में सामान्य लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर न केवल काम कर रही हैं बल्कि परिवार भी चला रही हैं। दिव्यांगों को निश्शुल्क प्रशिक्षण देने वाले सौभाग्य फाउंडेशन के अमित मेहरोत्रा ने बताया कि ऐसे लोगो में सीखने की प्रवृत्ति सामान्य लोगों से कई गुना ज्यादा होती है। रागिनी के साथ ही बुशरा तो मल्टी टैलेंटेड है। वह एक मल्टीनेशन कंपनी में सेल्स एसोसिएट के तौर पर काम कर रही है। तीन युवतियां ही नहीं ऐसी 300 से अधिक दिव्यांग युवा युवतियां कंपनियों में काम करके समाज को एक नई दिशा दे रही हैं।



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