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Interview: 'एंड टुमारो वी विल बी डेड' में तालिबानी कमांडर बने सिद्धांत कार्णिक ने कहा- 'तालिबान के माइंडसेट को दिखाती है फ़िल्म'

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एक था राजा एक थी रानी, किस्मत, माही वे और मेरा साई जैसे धारावाहिकों के ज़रिए अपनी पहचान पुख्ता कर चुके सिद्धांत कार्णिक के करियर में एक बड़ा और अहम पड़ाव आया है। सिद्धांत माइकल स्टाइनर की फ़िल्म 'एंड टुमारो वी विल बी डेड' (And Tomorrow We Will Be Dead) फ़िल्म से इंटरनेशनल डेब्यू कर रहे हैं। 'एंड टुमारो वी विल बी डेड' होस्टेज ड्रामा है, जिसकी कहानी 2011 में तालिबानियों द्वारा एक स्विस कपल डैनिला विडमर (मोर्गेन फेरु) और डेविड ओच (स्वेन शेलकर) को किडनैप करने की वास्तविक घटना पर आधारित है। सिद्धांत, फ़िल्म में तालिबानी कमांडर और मध्यस्थ (Negotiator) नज़रजान की भूमिका में हैं। 23 सितम्बर से शुरू हुए 10 दिवसीय ज़्यूरिख फ़िल्म फेस्टिवल की शुरुआत 'एंड टुमारो वी विल बी डेड' की स्क्रीनिंग के साथ हुई। सिद्धांत ने जागरण डॉट कॉम से बातचीत में अपने किरदार और फ़िल्म की यात्रा से जुड़े कई दिलचस्प किस्से शेयर किये। सिद्धांत, सबसे पहले मैं आपसे जानना चाहूंगा, 'एंड टुमारो वी विल बी डेड' आप तक कैसे पहुंची? फ़िल्म इंडस्ट्री के जाने-माने कास्टिंग डायरेक्टर हैं- नंदिनी श्रीकांत और करण माही। ये लोग इंटरनेशनल वर्क बहुत करते हैं। जब भी बाहर का कोई प्रोडक्शन हाउस इंडियन कलाकारों के साथ शूट करना चाहता है तो इन लोगों से ही सम्पर्क करता है। मेरे किरदार नज़रजान के लिए मेकर्स को एक अफ़गान या पठान जैसे दिखने वाले 6 फुट लम्बे कलाकार की ज़रूरत थी। जनवरी 2020 में फ़िल्म की टीम ख़ुद आडिशन लेने भारत आयी थी। काफ़ी सारे लोगों ने ऑडिशन दिया। उसी दौरान मुझे सिलेक्ट किया गया। तालिबान में यही एक शख़्स हैं, जो अंग्रेज़ी काफ़ी अच्छे से बोल सकते थे। इसलिए उनको हॉस्टेज निगोसिएशन इंचार्ज बना दिया गया था। जब मैंने अपने किरदार के लिए रिसर्च की तो पता चला कि उस एरिया में तालिबान के लिए किडनैपिंग धंधे जैसा है। वो सिर्फ़ अमेरिकी या स्विस लोगों को नहीं, बल्कि भारतीय और नेपाली लोगों को भी किडनैप करते हैं और फिर जिन कंपनी के लिए बंधक काम करते हैं, उनसे फिरौती मांगते हैं।



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